Muzaffarnagar की नदियों से लेकर हवा तक, 🌍 सबकी जिम्मेदारी है संरक्षण – Geetesh Chandra
Muzaffarnagar, जिसे उत्तर प्रदेश का औद्योगिक हब कहा जाता है, आज प्रदूषण की मार झेल रहा है। यहाँ की फैक्ट्रियाँ और इंडस्ट्रियल एरिया जहाँ एक ओर रोज़गार और विकास के अवसर दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पानी और हवा का प्रदूषण लोगों की सेहत और पर्यावरण पर गहरा असर डाल रहा है।
इस मुद्दे पर यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) मुज़फ्फरनगर के क्षेत्रीय अधिकारी गीतेश चंद्रा और सहायक पर्यावरण अभियंता कुंवर संतोष कुमार ने विस्तार से बातचीत की और बताया कि प्रदूषण किस तरह हमारी ज़िंदगी में चुपचाप ज़हर घोल रहा है।
“पानी का प्रदूषण हमारी नसों में ज़हर घोल रहा है” – गीतेश चंद्रा


गीतेश चंद्रा ने चिंता जताते हुए कहा कि मुज़फ्फरनगर के कई इलाकों में फैक्ट्रियों से निकलने वाला अनट्रीटेड पानी (Untreated Effluent) सीधे नालों और नदियों में छोड़ा जा रहा है। यह पानी धीरे-धीरे भूजल में मिलकर पूरे इलाके को बीमार बना देता है। “यह धीरे-धीरे फैलने वाली बीमारी है। शुरुआत में लोग इसे सामान्य समझते हैं, लेकिन लंबे समय में पेट की बीमारी, लीवर की दिक्कत और यहाँ तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियाँ इसी गंदे पानी की वजह से होती हैं।”
समाधान:
- हर फैक्ट्री को Effluent Treatment Plant (ETP) चलाना अनिवार्य है।
- छोटे उद्योगों को भी साझा ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) का उपयोग करना चाहिए।
- भूजल की लगातार जाँच ज़रूरी है ताकि तुरंत पता चल सके कि प्रदूषण कहाँ और कितना फैला है।
“हवा का प्रदूषण – अदृश्य लेकिन घातक” – कुंवर संतोष कुमार
सहायक पर्यावरण अभियंता कुंवर संतोष कुमार ने बताया कि हवा में घुलता धुआँ और Plume (धुएँ का गुबार) आम जनता के लिए बड़ा खतरा है। “हवा का प्रदूषण दिखाई नहीं देता, लेकिन इसका असर सबसे खतरनाक है। यह धीरे-धीरे शरीर को अंदर से कमजोर कर देता है।”
समाधान:
- हर उद्योग को अपनी चिमनी पर एयर फ़िल्टर और स्क्रबर लगाना चाहिए।
- हवा की गुणवत्ता की निगरानी के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लगाना आवश्यक है।
- शहरी इलाकों में ग्रीन बेल्ट और पौधारोपण को बढ़ावा देना होगा।
प्रदूषण का असर: जनता पर बोझ
स्वास्थ्य पर असर
- बच्चों में दमा और फेफड़ों की बीमारी
- बुजुर्गों में दिल और किडनी से जुड़ी समस्याएँ
- पेट और त्वचा संबंधी रोग
- लंबी अवधि में कैंसर जैसी बीमारियाँ
खेती पर असर
- प्रदूषित पानी से सिंचित फसलें गुणवत्ता खो देती हैं।
- खेत की मिट्टी खराब होती है और पैदावार घट जाती है।
- पशुधन भी बीमार होता है क्योंकि वही पानी उन्हें भी पिलाया जाता है।
समाज पर असर
- इलाज का खर्च बढ़ता है।
- लोगों की जीवन प्रत्याशा कम होती है।
- स्वच्छ पानी और साफ हवा के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
जनता की भूमिका: प्रदूषण पर नियंत्रण में सहयोग दें
यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने साफ किया कि सिर्फ सरकार और उद्योग ही नहीं, बल्कि जनता को भी जागरूक होना होगा।
- घर से निकलने वाले कचरे को अलग-अलग करें।
- प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करें।
- अधिक से अधिक पेड़ लगाएँ और उनकी देखभाल करें।
- पानी और बिजली की बर्बादी बंद करें।
- अगर कहीं गंदा पानी या धुआँ छोड़ा जा रहा है तो तुरंत विभाग को सूचित करें।
UPPCB का संदेश: “साफ हवा और पानी, सबका अधिकार”
“प्रदूषण को रोकना हमारी आने वाली पीढ़ियों का हक़ है। आज हम अगर जागरूक नहीं होंगे तो कल साफ हवा और पीने लायक पानी सबसे बड़ी चुनौती होगी।”— गीतेश चंद्रा , क्षेत्रीय अधिकारी, UPPCB
“हमें विकास चाहिए, लेकिन विकास ऐसा हो जो पर्यावरण के अनुकूल हो। उद्योग और पर्यावरण साथ-साथ चल सकते हैं, बस ज़रूरत है सख्ती और जागरूकता की।”— कुंवर संतोष कुमार, सहायक पर्यावरण अभियंता, UPPCB








