शत्रु सम्पत्ति प्रकरण एक बार फिर मामला चर्चाओं में: सरकार का दखल देना किसी की भी समझ से परे- उद्योगपति आलोक स्वरूप
मुजफ्फरनगर। शत्रु सम्पत्ति प्रकरण को लेकर एक बार फिर मामला चर्चाओं में है। कुछ समय पूर्व शत्रु सम्पत्ति को लेकर नगर के अनेक पक्षकारों को तहसीलदार की ओर से नोटिस भेजे गये थे।
यह प्रकरण अभी तहसीलदार सदर के यहां लम्बित है। उद्योगपति आलोक स्वरूप ने बालाजी चौक स्थित एक रेस्टोरेंट में पत्रकारों से वार्ता करते हुए बताया कि प्रशासन द्वारा एक पक्षीय आदेश पारित किया गया है।
एक पक्षीय आदेश पारित
इसमे जो विवादित भूमि पहले 570 बीघा थी अब नये आदेश में वह मात्र 51 बीघा रह गयी है। यदि यह शत्रु सम्पत्ति है तो पूरी 570 बीघा सम्पत्ति शत्रु सम्पत्ति घोषित होनी चाहिए।
उक्त 51 बीघा जमीन में द्वारिकापुरी के अनेक आवास, ओम पैराडाइज बिल्डिंग, पूर्व का 21 सेन्टूरी आवास सहित लगभग 300 से ज्यादा परिवार शामिल है।
पूर्व विधायक अशोक कंसल, आरएसएस नेता ज्ञानचंद सिंघल सहित पूर्व मंत्री स्व. चितरंजन स्वरूप के पुत्र का आवास भी शामिल है। लिंक रोड़ स्थित कमला फार्म्स, भावना फार्म और माउंट लिट्रा स्कूल का भी लगभग 200 गज जगह इसमे शामिल है। इसके अलावा द्वारिकापुरी, जिला जेल के निकट शिवपुरी का एक बड़ा हिस्सा भी 51 बीघा जमीन में सम्मिलित है।
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 के अंतर्गत निरस्त कर भूमि राज्य सरकार में दर्ज
उद्योगपति आलोक स्वरूप ने बताया कि उपजिलाधिकारी सदर मुजफ्फरनगर द्वारा 31 दिसम्बर 2020 को एक आदेश पारित करते हुए कहा है कि ग्राम युसूफपुर बाहरहदूद के खाता संख्या 3 खसरा नम्बर 37, 39, 43, 44 व 45 हैंक्ट. है। इसी के खाता संख्या 7 खसरा नम्बर 182, 202, 361, 363, 364, 370, 374, 375, 376, 378 हैक्ट. ग्राम युसूफपुर नॉन जेड ए..के. के खाता संख्या 5 खसरा नं. 365, 366 खाता संख्या 7 के खसरा नं. 371, 372, 373, 377, 379, 382, 383 व 384 हैक्ट. तथा खाता संख्या 12 खसरा नं. 203, 204 हैक्ट. से वर्तमान प्रविष्टि को धारा -38 (5) उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 के अंतर्गत निरस्त कर भूमि को राज्य सरकार में दर्ज किया जाता है।
इस पर आलोक स्वरूप ने कहा है कि यह आदेश न्यायोचित नहीं तथा नियम विरूद्ध है। उन्होंने कहा कि नोटिस सं. 22 दिनांक 15.6.2020 विपक्षी प्रतिवादी आलोक स्वरूप, अनिल स्वरूप पुत्रगण विनोद कुमार सिंह के द्वारा नोटिस की प्रति प्राप्त न करने के कारण उक्त नोटिस की प्रति उनके दक्षिण मुहाने पर चस्पा की गयी है।
वह प्रतिवादीगणों को जवाब व साक्ष्य प्रस्तुत करने हेतु पर्याप्त अवसर प्रदान किया गया है लेकिन उनके द्वारा कोई जवाब या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। आलोक स्वरूप ने कहा कि वास्विकता यह है कि उन्होंने स्वंय नोटिस की तामिल करते हुए एसडीएम सदर को एक प्रार्थना पत्र दिनांक 27.6.2020 को प्रेषित करते हुए अवगत कराया था कि कोरोना महामारी के चलते वे घर से बाहर नहीं जा रहे है
इसलिए जुलाई, अगस्त की तारीख निर्धारित की जाये किंतु आज तक उन्हे अवगत नहीं कराया गया है कि इस मामले में कौन सी तारीख लगायी गयी है। मुजफ्फरनगर शहर – सिटी न्यूज
उन्होंने कहा कि उनके द्वारा भेजा गया रजिस्टर्ड पत्र एसडीएम कार्यालय के प्राप्त हो गया था लेकिन फिर भी एक पक्षीय आदेश किया गया है। उन्होंने कहा है कि उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने भी निर्देश दे रखे है कि कोरोना काल में विशेष रूप से नोटिस निर्गत करना और मात्र 6 माह के अंदर एक पक्षीय आदेश करना यह सोच का विषय है।
आलोक स्वरूप ने कहा है कि कोरोना काल से भी पहले के वर्षो पुराने केस लम्बित चल रहे है लेकिन उनके मामले में मात्र 6 माह में एक पक्षीय कार्यवाही करना सामान्य बात नहीं है। उन्होंने बताया कि हमने नोटिस नं. 178 27 जनवरी 2018 को तहसीलदार सदर द्वारा अज्ञात शिकायकर्ता के आधार पर केवल हमको निर्गत किया गया था।
तीन साल होने के बावजूद उस पर आज तक आदेश पारित नहीं किया गया है। शत्रु सम्पत्ति अधिनियम में एक ओर नोटिस 371 दिनांक 13.4.2018 जिस पर हमने अपना प्रत्यावेदन तीन साल पहले ही दाखिल कर दिया था परंतु उस पर भी आज तक कोई सुनवाई की तिथि तय नहीं की गयी है।
विवादित भूमि शत्रु सम्पत्ति नहीं– आलोक स्वरूप
आलोक स्वरूप ने कहा कि विवादित भूमि शत्रु सम्पत्ति नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली ने उक्त विवादित भूमि का स्वामित्व सरकार का नहीं माना है और उसे निजि स्वामित्व बताया है। उन्होंने कहा कि उनके किसी भी प्रार्थना पत्र का जवाब नहीं दिया गया है तथा एक नया नोटिस उन्हे प्रेषित कर दिया गया है जिसमें एक पक्षीय आदेश है।
विवादित भूमि जो अब तक 570 बीघा बतायी गयी थी नये नोटिस संख्या 32 के अनुसार अब वह मात्र 51 बीघा रह गयी है। यदि यह शत्रु सम्पत्ति मानी जाती है तो पूरी 571 बीघा सम्पत्ति को शत्रु सम्पत्ति माना जाये। उन्होंने कहा कि नोटिस नं. 32 में मूल बिंदु कटिंग, ओवरराइटिंग खतौनी के खसरा नम्बरों में किया जाना दर्शाया गया है जबकि खसरा खतौनी अधिकारियों के पास होती है तथा बाहर का कोई व्यक्ति कैसे उनमे कटिंग या ओवरराइटिंग कर सकता है।
नोटिस नम्बर 32 के अनुसार केवल मुझे तथा मेरी काबिज सम्पत्ति पर ही दिया गया है। वर्तमान में मैं मात्र 12-13 बीघा पर ही काबिज हूं जबकि आदेश में जो अन्य भूमि दर्शायी गयी है उनमे कई कालोनियां बनी है तथा सैकडों परिवार काबिज है तथा वे सम्पत्ति के स्वामी है। उन्होंने कहा कि जब नोटिस में खसरा नम्बर 37, 39, 43, 44, 45, 182, 202, 361, 363, 364, 370, 374, 375, 376, 378, 365, 366, 371, 372, 373, 377, 379, 382, 383, 384, 203, 204 उल्लेखित है तो समस्त कब्जाधारियों को चिन्हित कर उनको नोटिस दिया जाना चाहिए
जिससे वे सभी अपनी सम्पत्ति के बारे में अपना पक्ष रख सके। उपजिलाधिकारी द्वारा केवल मेरे विरूद्ध एक्स पार्टी आदेश कर बिना किसी को पक्षकार बनाये नोटिस दे दिया है जो न्यायहित में नहीं है।
नोटिस सभी कब्जाधारियों को दिया जाना चाहिए और उसकी सार्वजनिक सूचना समाचार पत्रों में दी जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने अपने आदेश जितेंद्र बहादुर सिंह बनाम स्टेट ऑफ यूपी एवं 5 अन्य 4.9.2015 में इसका उल्लेख किया था। जिसके बाद मुख्य सचिव ने एक जीयो नम्बर 650 (1) 1-9-15-रा.-9 दिनांक 16.9.2015 को जारी किया था जिसमें स्पष्ट रूप से उपजिलाधिकारी/अन्य अधिकारियों को प्रतिबंधित किया था कि निजी वाद में सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विवादित भूमि शत्रु सम्पत्ति घोषित होनी चाहिए तब सरकार का हस्तक्षेप न्यायोचित होगा।
सरकार ने स्वंय विवादित भूमि को कभी नवाब साहब की या शत्रु सम्पत्ति नहीं माना है। सरकार ने स्वंय इस विवादित भूमि के कुछ भाग का अधिग्रहण किया था और उसकी अधिग्रहण राशि लाला दीपचंद को अदा की थी।
सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली का आदेश
अधिग्रहण राशि भी सर्वोच्च न्यायालय ने तय की थी। सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली का आदेश लाला दुर्गाप्रसाद व अन्य, लाला दीपंचद व अन्य 18.11.1953 का है। आलोक स्वरूप ने मांग की है कि उनके नोटिस पर ध्यान देते हुए सुनवाई की जाये तथा तथा उन्हे जो नोटिस दिया गया है उसे समाप्त कराया जाये
सम्पत्ति पर काबिज सभी लोगों को नोटिस दिया जाये ताकि वे सरकार के समक्ष अपना पक्ष रख सके। प्रेसवार्ता के दौरान आलोक स्वरूप, अनिल स्वरूप, ललित माहेश्वरी, बार संघ के पूर्व अध्यक्ष नसीर हैदर काजमी, मुश्ताक अली एडवोकेट, वरूण भंडारी माउंट लिट्रा, जोगेंद्र कुमार प्रधानाचार्य माउंट लिट्रा आदि मौजूद रहे।
प्रशासनिक अधिकारी उत्पीडन की कार्यवाही पर आमदा
मुजफ्फरनगर। पत्रकार वार्ता में आलोक स्वरूप ने बताया कि प्रशासनिक अधिकारी जो कब्जा लेने आये थे वो 27 खसरों की बात कह रहे है जबकि उनके पास केवल 6 खसरे है और इनमे तीन सम्पत्ति कमला फार्म्स, भावना फार्मस और मांउट लिट्रा का एक हिस्सा आ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तेजी से प्रशासन की कार्यवाही चल रही है और उनके प्रत्यावेदन पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है
न ही संज्ञान लिया जा रहा है इससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि कोई विशिष्ट लॉबी का प्रेशर पड रहा है जिसके दबाव में प्रशासनिक अधिकारी उक्त कथित उत्पीडन की कार्यवाही पर आमदा है
यह कार्यवाही न्यायोचित नहीं है। यदि कोई इस प्रकरण में व्यक्ति या लोभी शामिल है तो बेहतर है कि वो समाज के हित मे ंसामने आये और अपनी मंशा का खुलासा करे।
वस्तुतः जब ये शत्रु सम्पत्ति नहीं है और विवाद दो पक्षों के बीच है तो ऐसे में सरकार का दखल देना किसी की भी समझ से परे है। सरकार दो स्टैंड पर कभी भी एक साथ टिकी नहीं रह सकती।
सरकार या तो इसे शत्रु सम्पत्ति घोषित करे यदि ऐसा नहीं मानती है तो फिर ये दो प्राईवेट पक्षों के बीच का विवाद समझे और दखलअंदाजी बंद करे।
