वैश्विक

म्यांमार में तख्तापलट: आंग सान सू की और राष्ट्रपति म्यिंट हिरासत में, विश्वभर में निंदा

म्यांमार में सोमवार को तख्तापलट हो गया है। म्यांमार की सेना ने देश की सर्वोच्च नेता आंग सान सू की और राष्ट्रपति विन म्यिंट समेत कई वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में ले लिया है। सेना ने देश में एक साल के लिए आपातकाल की घोषणा करते हुए सत्ता पर कब्जा कर लिया है। म्यांमार की सेना के इस कदम की अमेरिका समेत विश्वभर के देशों व नेताओं ने कड़ी निंदा की है और तुरंत लोकतंत्र बहाल करने की मांग की है। 

म्यांमार में मचे इस सियासी भूचाल पर वहां की सेना का कहना है कि चुनाव में हुई धोखाधड़ी के जवाब में तख्तापलट की कार्रवाई की गई है। तख्तापलट के साथ ही देश के अलग-अलग हिस्सों में सेना की टुकड़ियों की तैनाती कर दी गई है। म्यांमार के मुख्य शहर यांगून में सिटी हॉल के बाहर सैनिकों को तैनात किया गया है ताकि कोई तख्तापलट का विरोध न कर सके।

इससे पहले, सत्तारूढ़ पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी के प्रवक्ता न्यंट ने आंग सू की और राष्ट्रपति विन म्यिंट समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं को सेना द्वारा हिरासत में लिए जाने की पुष्टि की। साथ ही उन्होंने कहा, ”हम अपने लोगों से कहना चाहते हैं कि वे जल्दबाजी में जवाब न दें। वे कानून के मुताबिक कार्रवाई करें।”

म्यांमार में लंबे समय तक सैन्य शासन रहा है। वर्ष 1962 से लेकर साल 2011 तक देश में सैन्य तानाशाही रही है। वर्ष 2010 में म्यांमार में आम चुनाव हुए और 2011 में म्यांमार में ‘नागरिक सरकार’ बनी, जिसमें जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों के हाथ देश की कमान सौंपी गई। नागरिक सरकार बनने के बाद भी असली ताकत हमेशा सेना के पास ही रही। इसलिए आज की घटना राजनीतिक संकट का वास्तविक रूप है।  

भारत ने म्यांमार के राजनीतिक घटनाक्रम पर चिंता जताई है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा,” म्यांमार के घटनाक्रम से बेहद चिंतित हैं। भारत हमेशा से म्यांमार में लोकतंत्र प्रक्रिया के समर्थन में रहा है। हमारा मानना है कि देश में काननू और लोकतंत्र प्रक्रिया को बरकरार रखा जाए। म्यांमार की स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं।” भारत के अलावा अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों ने तख्तापलट पर चिंता जताई है। साथ ही म्यांमार की सेना से कानून का सम्मान करने की अपील की है।

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता जेन साकी ने कहा कि म्यांमार की सेना ने देश की सर्वोच्च नेता आंग सान सू की और अन्य वरिष्ठ नागरिकों को गिरफ्तार कर देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को खत्म करने का कदम उठाया है।

अमेरिका ने म्यांमार की सेना को चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका ने हाल के चुनावों के परिणामों को बदलने या म्यांमार के लोकतांत्रिक व्यवस्था को बाधित करने के किसी भी प्रयास का विरोध किया है।

अगर ये तख्तापलट खत्म नहीं हुआ, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।  वहीं ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री मरिज पायने ने सू की की रिहाई की मांग करते हुए कहा कि हम नवंबर 2020 के आम चुनाव के परिणामों के अनुरूप नेशनल असेंबली के शांतिपूर्ण पुनर्गठन का पुरजोर समर्थन करते हैं।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भी म्यांमार में तख्ता पलट की निंदा की है। उन्होंने कहा कि आंग सान सू की और अन्य नेताओं को गिरफ्तार किए जाने की वह निंदा करते हैं। जॉनसन ने ट्वीट कर कहा कि लोगों का लोगों के वोट का आदर किया जाना चाहिए। 

बांग्लादेश ने भी म्यांमार में शांति व स्थिरता बहाल करने की मांग की है। उम्मीद जताई  कि ताजा घटनाक्रम से रोहिंग्या के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी। देश के विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि म्यांमार में जल्द लोकतांत्रिक प्रबंध कायम होंगे। 

 

News Desk

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