उत्तर प्रदेश

Ayushman Bharat Yojana- मुफ्त इलाज में फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए मरीज का फोटो पोर्टल पर अपलोड करने के लिए कहा गया

Ayushman Bharat Yojana के तहत मुफ्त इलाज में फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए जारी नई गाइडलाइन मरीजों पर भारी पड़ रही है। अब सर्जरी के दौरान मरीजों के अंगों की फोटो चेहरे के साथ अपलोड करनी है, जिससे उनकी निजता प्रभावित हो रही है। जानकार भी इसे मरीजों के निजता के अधिकार का हनन बता रहे हैं।

योजना के लाभार्थी को इलाज के लिए पांच लाख रुपये तक सालाना बीमा मिलता है। इसमें भर्ती मरीजों की जांच से लेकर ऑपरेशन का खर्च शामिल होता है। एजेंसी के माध्यम से सरकार इलाज का खर्च उठाती है। 

कई निजी अस्पतालों ने मरीजों को फर्जी तरीके से आईसीयू में भर्ती दिखाया तो फर्जी ऑपरेशन भी दिखाकर मोटा रुपया वसूला गया। इसे देखते हुए मरीज के भर्ती के रहने के दौरान रोजाना जियो टैगिंग के साथ फोटो अपलोड करने को कहा गया।

नई गाइडलाइन में ऑपरेशन के समय मरीज का फोटो पोर्टल पर अपलोड करने के लिए कहा गया है। शर्त यह है कि मरीज के अंग तथा उसके चेहरे का फोटो होना चाहिए।

आयुष्मान भारत योजना जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजनाओं के तहत भ्रष्टाचार और निजता के मुद्दों का सामना करना गंभीर समस्या है। नई गाइडलाइन्स जारी करने के बाद, जिसमें मरीजों के चेहरे के साथ उनके अंगों की फोटो ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने की मांग की जा रही है, इसने समाज में बड़ी हलचल मचा दी है। इसके प्रभाव को समझने के लिए इस मुद्दे की गहराई से जांच की आवश्यकता है।

आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य है गरीब और वंचित वर्ग के लोगों को सस्ते और गुणवत्ता प्रमाणित चिकित्सा सेवाओं तक पहुँच प्रदान करना। इसके अंतर्गत, योजना ने बड़ी संख्या में लोगों को वाणिज्यिक चिकित्सा संस्थानों के उच्च चिकित्सा व्ययों से बचाया है और सामाजिक समर्थन प्रदान किया है।

हालांकि, इस योजना के तहत हुए फर्जीवाड़े के मामलों ने इसकी सफलता पर प्रश्न उठाए हैं। कई निजी अस्पतालों ने ऐसे मामलों में शामिल होकर अपने लाभ की कोशिश की है, जहां उन्होंने फर्जी ऑपरेशन और असामयिक भर्ती कर मरीजों से ज्यादा पैसे वसूलने का प्रयास किया है। इसके परिणामस्वरूप, सरकार ने नई गाइडलाइन्स जारी की हैं ताकि इस प्रकार के भ्रष्टाचार को रोका जा सके।

नई गाइडलाइन्स के अनुसार, जब भी कोई मरीज ऑपरेशन के लिए भर्ती होता है, उसके अंगों और चेहरे की फोटो ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड की जानी चाहिए। यह उन मरीजों के निजीता के मामले में एक समस्यात्मक कदम है, जिन्हें इस स्वास्थ्य योजना के तहत सच्ची मदद दी जानी चाहिए, न कि उनकी निजी जानकारी की गंभीरता का हनन किया जाए।

इसके अलावा, सामाजिक प्रभाव भी इस मुद्दे पर विचार करने के लिए महत्वपूर्ण है। यह व्यवहारिकता और नैतिकता के मुद्दे भी उठाता है, जिसमें सार्वजनिक भर्ती के दौरान मरीजों की निजता का मामला उठाया जाना है। यह योजना असली और आवश्यक चिकित्सा सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से बनाई गई है, और इसे फर्जीवाड़े जैसे अपराधों से दूर रखना जरूरी है।

सरकारी पहलों ने इस मामले में कठोर कदम उठाए हैं और विशेषज्ञों को नियुक्त किया है ताकि योजना के तहत सही और निष्पक्ष इलाज प्रदान किया जा सके। इस प्रकार, सामाजिक न्याय को बनाए रखने के साथ-साथ, योजना के लाभार्थियों को भी विश्वास और सहायता प्रदान करने में मदद मिल सकती है।

इस विषय पर लंबी बातचीत करने के लिए, नये सिद्धांत और योजनाएं लागू करने की आवश्यकता है ताकि समाज के सबसे कमजोर और सबसे जरूरतमंद वर्ग को उचित समर्थन प्रदान किया जा सके।

News-Desk

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